नए कर्मचारी संघ ने चुनाव के दौरान इस व्यवस्था को समाप्त कर टेंडर आधारित, पारदर्शी प्रणाली लागू करने का मुद्दा चुनावी घोषणा पत्र में था। चुनाव उपरांत संघ ने अपनी घोषणा को अमल में लाते हुए शासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की, जिसमें कैंटीन की गुणवत्ता, सेवा में देरी और सब्सिडी के औचित्य पर गंभीर सवाल उठाए गए। शासन ने इन बिंदुओं को संजीदगी से लेते हुए प्रकरण की समीक्षा प्रारंभ की।
प्रशासनिक स्तर पर फाइल को परीक्षण हेतु वित्त विभाग को भेजा गया, जहां कर्मचारी संघ द्वारा उठाई गई आपत्तियों के आधार पर सब्सिडी पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। सेवा निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से ICH को सीमित अवधि के लिए विस्तार दिया गया, परंतु यह स्पष्ट कर दिया गया कि आगे सब्सिडी जारी नहीं रहेगी।
सब्सिडी समाप्त होने के बाद ICH ने बिना वित्तीय समर्थन के संचालन जारी रखने में असमर्थता जताई, जिसके परिणामस्वरूप खुली निविदा प्रक्रिया प्रारंभ की गई। प्रारंभिक चरणों में अपेक्षित प्रतिस्पर्धा नहीं मिली, परंतु पुनः प्रयासों के बाद अंततः एक एजेंसी का चयन कर नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
अब कैंटीन पूर्णतः लागत-आधारित मॉडल पर संचालित होगी, जहां दरों का निर्धारण वास्तविक लागत के अनुरूप किया जाएगा। यह परिवर्तन उसी मांग का प्रत्यक्ष परिणाम है जिसे कर्मचारी संघ ने अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से रखा था।
आगामी समय में यह देखा जाना शेष है कि नई व्यवस्था कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है।
